भूटान में फटी ग्लेशियर झील, भारत के इन राज्यों पर मंडराया बाढ़ का खतरा; जानिए पूरा मामला

भूटान में झील फटने से मची तबाही, बंगाल-असम में बाढ़ का अलर्ट जारी
उत्तर-पश्चिमी भूटान में ग्लेशियर झील फटने से अचानक भीषण बाढ़ आ गई है। गासा जिले में स्थित शिंताफू ग्लेशियर झील का पानी तेजी से बाहर निकलने के कारण मो छू नदी में उफान आ गया। बाढ़ का पानी अपने साथ प्रसिद्ध गासा त्साचू गर्म पानी के झरने को भी बहा ले गया। इस घटना के बाद भारत के पश्चिम बंगाल और असम में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। दोनों राज्यों के सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। आखिर ग्लेशियर झील कैसे फटती है और भारत के किन इलाकों पर इसका असर पड़ सकता है? आइए जानते हैं पूरा मामला।
भूटान में कैसे आई अचानक बाढ़?

भूटान के गासा जिले में शिंताफू ग्लेशियर झील फटने के बाद बड़ी मात्रा में पानी तेजी से बाहर निकलने लगा। इस घटना को ग्लेशियर झील विस्फोट बाढ़ कहा जाता है। झील से निकला पानी मो छू नदी में पहुंचा, जिससे नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया।
इस बाढ़ का असर आसपास के इलाकों में भी देखने को मिला। प्रसिद्ध गासा त्साचू गर्म पानी का झरना पूरी तरह बह गया। इससे क्षेत्र के प्राकृतिक पर्यटन स्थल को भारी नुकसान पहुंचा है।
कौन-कौन से भारतीय इलाके खतरे में?
भूटान से निकलने वाली नदियों का पानी भारत के कई हिस्सों से होकर गुजरता है। ऐसे में वहां आई बाढ़ का असर सीमावर्ती भारतीय इलाकों में भी पड़ सकता है।
प्रशासन ने जिन इलाकों को लेकर सतर्कता बरतने को कहा है, उनमें शामिल हैं:
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असम: धुबरी जिला और निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका।
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पश्चिम बंगाल: दार्जिलिंग की पहाड़ियां, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी।
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कूच बिहार: संकोश नदी के किनारे बसे गांवों में विशेष सतर्कता।
संकोश नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। दार्जिलिंग के तराई और डुआर्स क्षेत्रों में भी प्रशासन निगरानी कर रहा है।
असम के मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भूटान में आई बाढ़ के बाद पैदा हुई स्थिति पर नजर रखने की बात कही है।
उन्होंने बताया कि धुबरी जिले के उपायुक्त मौके पर मौजूद हैं। निचले इलाकों में संभावित बाढ़ के प्रभाव से निपटने के लिए प्रशासन को तैयार रखा गया है।
वहीं दार्जिलिंग से भाजपा सांसद राजू बिष्ट ने भी लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने बताया कि भूटान के लेमथांग क्षेत्र में ग्लेशियर झील फटने के बाद पानी मो छू नदी से होते हुए संकोश नदी की ओर बढ़ रहा है।

2021 में भी बह गया था गासा त्साचू
भूटान में ग्लेशियर झीलों से बाढ़ का खतरा पहले भी सामने आ चुका है। 26 अगस्त 2021 को आई भीषण बाढ़ में गासा त्साचू गर्म पानी का झरना प्रभावित हुआ था।
उस समय मो छू नदी में पानी का बहाव इतना तेज हो गया था कि नदी ने अपना रास्ता बदल लिया था और गर्म पानी के झरने की ओर बढ़ गई थी।
इस बार फिर झील फटने से उसी क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है।
ग्लेशियर झील फटने से बाढ़ कैसे आती है?

ग्लेशियर यानी हिमनद बर्फ से बनी विशाल प्राकृतिक संरचनाएं होती हैं। जब तापमान बढ़ने के कारण ग्लेशियर पिघलते हैं, तो उनके आसपास बड़ी मात्रा में पानी जमा होने लगता है। धीरे-धीरे वहां झील बन जाती है।
इन झीलों को कई बार बर्फ, मिट्टी और पत्थरों से बने प्राकृतिक बांध रोककर रखते हैं। जब यह बांध टूट जाता है, तो झील का पानी अचानक तेज गति से नीचे की ओर बहने लगता है। इसी घटना को ग्लेशियर झील विस्फोट बाढ़ कहा जाता है।
इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:
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ग्लेशियर का तेजी से पिघलना।
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लगातार भारी बारिश होना।
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भूस्खलन या हिमस्खलन के कारण झील में बड़ी मात्रा में मलबा गिरना।
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भूकंप के कारण प्राकृतिक बांध का कमजोर होना।
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झील में पानी का स्तर अत्यधिक बढ़ जाना।
इस तरह की बाढ़ में पानी के साथ बड़े-बड़े पत्थर और मलबा भी बहकर आते हैं। इसलिए यह सामान्य नदी की बाढ़ से अधिक विनाशकारी हो सकती है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?

भूटान हिमालयी क्षेत्र में स्थित है और यहां से निकलने वाली कई नदियां भारत में प्रवेश करती हैं। ऐसे में भूटान में ग्लेशियर झीलों का फटना भारत के पूर्वोत्तर और पूर्वी राज्यों के लिए भी चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के कारण हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर झीलों से जुड़े खतरे पर निगरानी रखना जरूरी है।
फिलहाल पश्चिम बंगाल और असम के सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासन की निगरानी और लोगों की सतर्कता बेहद जरूरी है।












