नक्सलवाद पर लगाम से बदली बस्तर की तस्वीर! अब मलेरिया के खिलाफ तेज हुई जंग

सुकमा-बीजापुर के दूरस्थ गांवों तक पहुंच रहीं स्वास्थ्य सेवाएं, मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान को मिली गति
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सली गतिविधियों में कमी आने के साथ ही दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की कोशिशों को गति मिली है। सुकमा और बीजापुर जैसे संवेदनशील जिलों में अब स्वास्थ्य विभाग मलेरिया की जांच, उपचार और रोकथाम के लिए अभियान चला रहा है। प्रशासन का लक्ष्य उन गांवों तक भी चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना है, जहां पहले सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण स्वास्थ्य दलों को पहुंचने में कठिनाई होती थी।
छत्तीसगढ़ में मलेरिया के लाखों मामले दर्ज
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के एक अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2015 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ में मलेरिया के 3,91,387 मामले दर्ज किए गए। अध्ययन में सुकमा, बीजापुर, बस्तर, नारायणपुर और कोंडागांव जैसे दक्षिणी जिलों में मलेरिया के अधिक जोखिम की ओर भी ध्यान दिलाया गया है।
मलेरिया का खतरा विशेष रूप से उन वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों में अधिक चुनौतीपूर्ण है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सीमित है। ऐसे इलाकों में समय पर जांच और उपचार बीमारी की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण हैं।
मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान पर जोर
वर्ष 2030 तक देश को मलेरिया मुक्त बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य के तहत बस्तर में मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रभावित गांवों में लोगों की जांच, संक्रमित मरीजों का उपचार और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता पर ध्यान दिया जा रहा है।
सुकमा के कलेक्टर अमित कुमार के अनुसार, अंदरूनी क्षेत्रों में बड़े स्तर पर जांच और उपचार अभियान चलाए जा रहे हैं। गंभीर मरीजों के लिए बेहतर उपचार की व्यवस्था भी की जा रही है।
नक्सली चुनौती कम होने से स्वास्थ्य दलों को मदद
पहले नक्सली गतिविधियों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण कई दूरस्थ इलाकों में नियमित स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना कठिन होता था। अब सुरक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) सहित सुरक्षा बलों के सहयोग से स्वास्थ्य कर्मियों को इन क्षेत्रों तक पहुंचने में मदद मिल रही है।
दूरस्थ गांवों में चिकित्सा दलों की पहुंच बढ़ने से लोगों की जांच और समय पर उपचार की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं। हालांकि, अभियान की वास्तविक सफलता का आकलन मलेरिया के मामलों में लगातार कमी और नियमित स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता से किया जाएगा।
मलेरिया उन्मूलन के लिए आगे की चुनौती
बस्तर के वनांचल क्षेत्रों में मलेरिया पर नियंत्रण के लिए केवल जांच और दवाएं पर्याप्त नहीं हैं। नियमित निगरानी, मच्छरों से बचाव, मच्छरदानी का उपयोग और ग्रामीणों में जागरूकता भी जरूरी है।
सुकमा और बीजापुर में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार मलेरिया उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। अब चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि दूरस्थ गांवों के लोगों को भी लगातार और समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती रहें।












