
भाप में पकता है हिमाचल का यह पारंपरिक पकवान, भोपाल में भी बढ़ रहा सिड्डू का क्रेज
पहाड़ी खानपान की बात हो और हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का जिक्र न आए, ऐसा कम ही होता है। यहां के खानपान में स्थानीय अनाज, दालों, अखरोट और पारंपरिक तरीके से खाना बनाने की झलक मिलती है। इन्हीं खास व्यंजनों में शामिल है सिड्डू, जो अपने स्वाद, नरम बनावट और खास भरावन के लिए जाना जाता है। अब हिमाचल प्रदेश का यह पारंपरिक जायका मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी लोगों को आकर्षित कर रहा है।
भोपाल के कोलार रोड स्थित एक निजी कैफे में हिमाचली सिड्डू परोसा जा रहा है। कैफे का संचालन अजीत सिंह करते हैं। यहां आने वाले लोग पहाड़ों के इस पारंपरिक पकवान का स्वाद चख सकते हैं। खानपान में कुछ नया आजमाने वालों के लिए सिड्डू एक अलग अनुभव है, क्योंकि इसे सामान्य पकौड़ों या तले हुए नाश्ते की तरह नहीं, बल्कि भाप में पकाकर तैयार किया जाता है।
क्या होता है हिमाचली सिड्डू?
सिड्डू हिमाचल प्रदेश का पारंपरिक व्यंजन है, जिसे मुख्य रूप से गेहूं के आटे से बनाया जाता है। इसके अंदर दाल, अखरोट और मसालों की भरावन भरी जाती है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इसकी सामग्री और बनाने का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है।
इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसे भाप में पकाया जाता है। पकने के बाद इसकी बाहरी परत हल्की सख्त और अंदर का हिस्सा नरम रहता है। भरावन के मसाले इसे खास स्वाद देते हैं। इसे आमतौर पर घी, मक्खन या चटनी के साथ परोसा जाता है।
भाप में पककर तैयार होता है सिड्डू
सिड्डू बनाने में आटे को तैयार करने से लेकर भरावन भरने तक कई चरण होते हैं। पारंपरिक विधि में आटे को कुछ समय के लिए रखा जाता है, ताकि उसकी बनावट अच्छी हो सके। इसके बाद छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उनमें भरावन भरी जाती है और भाप में पकाया जाता है।
हिमाचली सिड्डू की पहचान इसके स्वाद के साथ-साथ इसे बनाने की पारंपरिक विधि से भी जुड़ी है। इसमें भरावन के रूप में दाल, अखरोट और स्थानीय मसालों का इस्तेमाल किया जा सकता है। तैयार सिड्डू को चटनी के साथ खाने पर इसका स्वाद और निखर जाता है।
घर पर भी बना सकते हैं हिमाचली सिड्डू, जानें आसान रेसिपी
अगर आप भोपाल में रहते हैं या हिमाचली व्यंजनों का स्वाद घर पर लेना चाहते हैं, तो सिड्डू को आसानी से बनाया जा सकता है। इसके लिए बहुत ज्यादा तेल की जरूरत नहीं होती, क्योंकि इसे तलने के बजाय भाप में पकाया जाता है।
सामग्री
आटे के लिए
-
2 कप गेहूं का आटा
-
आवश्यकतानुसार गुनगुना पानी
-
एक चुटकी नमक
-
थोड़ा खमीर या दही, वैकल्पिक
भरावन के लिए
-
आधा कप पिसी या दरदरी दाल
-
2 से 3 बड़े चम्मच बारीक कटे अखरोट
-
अदरक, लहसुन और हरी मिर्च
-
धनिया और स्वादानुसार नमक
-
जीरा और अन्य पसंदीदा मसाले
बनाने की विधि
1. आटा गूंथें
गेहूं के आटे में नमक डालकर पानी की मदद से नरम आटा गूंथ लें। चाहें तो थोड़ा खमीर मिलाकर ढककर रख दें, ताकि आटे में हल्की खमीर उठने की प्रक्रिया हो सके।
2. भरावन तैयार करें
दाल को आवश्यकतानुसार भिगोकर दरदरा पीस लें। इसमें अखरोट, अदरक, लहसुन, हरी मिर्च, धनिया और मसाले मिलाएं। भरावन बहुत गीली न रखें।
3. लोइयों में भरावन भरें
आटे की छोटी लोइयां बनाकर उन्हें थोड़ा फैलाएं। बीच में भरावन रखें और किनारों को अच्छी तरह बंद कर दें, ताकि पकाते समय भरावन बाहर न निकले।
4. भाप में पकाएं
तैयार सिड्डू को तेल लगी स्टीमर प्लेट में रखें। ढककर मध्यम आंच पर लगभग 20 से 30 मिनट तक पकाएं। आकार और भरावन के अनुसार समय बदल सकता है। अंदर तक पकने की जांच कर लें।
5. चटनी के साथ परोसें
तैयार सिड्डू को थोड़ा ठंडा होने दें और काटकर हरी धनिया या लहसुन की चटनी के साथ परोसें। चाहें तो ऊपर से थोड़ा घी भी डाल सकते हैं।
सिड्डू खाने के क्या हैं फायदे?
सिड्डू के फायदे उसमें इस्तेमाल की गई सामग्री और खाने की मात्रा पर निर्भर करते हैं। इसे संतुलित भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है।
-
ऊर्जा का स्रोत: गेहूं के आटे में कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देते हैं।
-
फाइबर मिल सकता है: साबुत गेहूं और दाल से बने सिड्डू में आहार फाइबर मिल सकता है, जो पाचन और पेट भरा रहने में मदद करता है।
-
प्रोटीन की पूर्ति: दाल की भरावन से भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है, जो मांसपेशियों और शरीर के ऊतकों के लिए जरूरी है।
-
अखरोट से पोषक तत्व: अखरोट में असंतृप्त वसा, कुछ प्रोटीन और उपयोगी सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं।
-
कम तेल में बनाने का विकल्प: भाप में पकने के कारण इसमें तलने के लिए अतिरिक्त तेल की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, ऊपर से डाला गया घी या मक्खन कुल कैलोरी बढ़ा सकता है।
ध्यान रखें कि सिड्डू अपने आप में किसी बीमारी का इलाज नहीं है। इसके पोषण संबंधी फायदे इस्तेमाल की गई सामग्री, आकार और साथ में परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों पर निर्भर करते हैं।
चटनी के साथ और बढ़ जाता है स्वाद
हिमाचली सिड्डू को हरी धनिया, लहसुन या स्थानीय मसालों से बनी चटनी के साथ खाया जाता है। इसकी नरम बनावट और भरावन का स्वाद चटनी के तीखेपन के साथ अच्छा मेल बनाता है। कुछ जगहों पर इसे घी या मक्खन के साथ भी परोसा जाता है।
भोपाल के कोलार रोड स्थित कैफे में इस पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन का मिलना उन लोगों के लिए खास है, जो अलग-अलग राज्यों के खानपान को जानना और चखना पसंद करते हैं। हालांकि, कैफे में इसकी कीमत और उपलब्धता की जानकारी साझा नहीं की गई है।












