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पेंड्रारोड स्टेशन पर चाय की कीमत और मात्रा को लेकर विवाद, रेलवे की कार्रवाई पर उठे सवाल

रेल मदद पर शिकायत के बाद जांच में 90 एमएल चाय देने की बात सामने आई, RTI में मांगी गई रेट लिस्ट की जानकारी IRCTC को भेजी गई

छत्तीसगढ़ के पेंड्रारोड रेलवे स्टेशन पर चाय की कीमत और निर्धारित मात्रा को लेकर सामने आया मामला अब रेलवे की निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। 10 अगस्त 2026 को रेल मदद के माध्यम से शिकायत संख्या 2026081003229 दर्ज की गई थी। शिकायत कैटरिंग और वेंडिंग सर्विस में कथित ओवरचार्जिंग से जुड़ी थी। रेलवे रिकॉर्ड के मुताबिक शिकायत को बाद में ‘Closed’ कर दिया गया।

रेलवे की जांच में सामने आया कि स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 स्थित फूड प्लाजा पर 90 एमएल चाय परोसी जा रही थी, जबकि निर्धारित मात्रा 120 एमएल बताई गई। जांच के बाद संबंधित विक्रेता को चेतावनी दी गई और भविष्य में 120 एमएल की निर्धारित मात्रा में चाय उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

हालांकि, इसी कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक विक्रेता ने बाद में चाय के पैसे वापस कर दिए थे। ऐसे में सवाल है कि यदि कोई अनियमितता नहीं थी तो रकम वापस क्यों की गई और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ था तो चेतावनी के अलावा क्या कार्रवाई की गई?

फोन कॉल की रिकॉर्डिंग को लेकर भी विवाद

मामले से जुड़ी एक फोन कॉल की रिकॉर्डिंग शिकायतकर्ता की ओर से सार्वजनिक की गई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि रिकॉर्डिंग में रेलवे अधिकारियों और विक्रेता से संबंधित बातचीत है। उसका आरोप है कि उसे विक्रेता से बातचीत करने के लिए कहा गया और बाद में शिकायत वापस लेने के लिए भी संपर्क किया गया।

हालांकि, रिकॉर्डिंग में किए गए दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन बातों को फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

शिकायतकर्ता के अनुसार बातचीत में यह भी कहा गया कि रेलवे में पांच रुपये की चाय बिक्री का प्रावधान नहीं है और स्टेशन पर 10 रुपये की फ्लेवर टी की रेट लिस्ट लगी हुई थी। लेकिन इसी रेट लिस्ट को लेकर RTI जवाब ने मामले को और पेचीदा बना दिया है।

RTI में मांगी गई थी रेट लिस्ट और जांच रिपोर्ट

शिकायतकर्ता ने RTI के जरिए कुल 15 बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इसमें 10 अगस्त 2026 को लागू मेन्यू और टैरिफ, खाद्य एवं पेय पदार्थों की कीमत, GST, जांच अधिकारी, जांच रिपोर्ट, विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई, लाइसेंस और कॉन्ट्रैक्ट समेत लागू रेट लिस्ट की जानकारी शामिल थी।

19 अगस्त 2026 को रेलवे की ओर से दिए गए जवाब में संबंधित जानकारी IRCTC से जुड़ी होने की बात कही गई। साथ ही RTI आवेदन के संबंधित बिंदुओं को RTI अधिनियम की धारा 6(3) के तहत क्षेत्रीय प्रबंधक, IRCTC को भेजे जाने की जानकारी दी गई।

ऐसे में अब सवाल यह है कि जिस 10 रुपये की फ्लेवर टी की रेट लिस्ट का हवाला दिए जाने का दावा है, उसकी प्रमाणित प्रति सामने क्यों नहीं आई। यात्रियों के लिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि उस समय स्टेशन पर कौन-सी चाय कितनी मात्रा में और किस कीमत पर बेचने की अनुमति थी।

शिकायत ‘Closed’ होने पर भी सवाल

शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने मामले में हुई कार्रवाई से संतुष्टि व्यक्त नहीं की थी और वह विक्रेता के खिलाफ उचित कार्रवाई की उम्मीद कर रहा था। इसके बावजूद शिकायत को ‘Closed’ कर दिया गया।

इस मामले में मुख्य सवाल सिर्फ चाय के कुछ रुपये का नहीं है। मामला रेलवे स्टेशनों पर खाद्य सामग्री की निर्धारित मात्रा, अधिकृत कीमत, रेट लिस्ट की उपलब्धता और विक्रेताओं की निगरानी से जुड़ा है।

रेलवे की ओर से यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि 90 एमएल चाय परोसे जाने की जांच में पुष्टि होने के बाद विक्रेता के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, पैसे वापस करने का आधार क्या था, 10 रुपये वाली फ्लेवर टी की अधिकृत रेट लिस्ट क्या है और शिकायतकर्ता की असहमति के बावजूद शिकायत को ‘Closed’ किस आधार पर किया गया।

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