
पीलीभीत में मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस का गंभीर आरोप, 13,150 पहचान संख्याओं में गड़बड़ी का दावा; चुनाव आयोग से जांच की मांग
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र के आंकड़े पेश करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मतदाता पहचान पत्र की संख्या समान रखते हुए हजारों मतदाताओं के नाम बदल दिए गए। पार्टी का दावा है कि जुलाई से सितंबर के बीच 13,150 मतदाताओं की पहचान संख्या और क्रम संख्या समान रहने के बावजूद उनके नाम बदलने की गड़बड़ी सामने आई है। इसके अलावा 804 वास्तविक मतदाताओं के नाम काटने और 2,600 ऐसे लोगों के नाम जोड़ने का भी आरोप लगाया गया है, जो कथित तौर पर उस क्षेत्र में नहीं रहते।
कांग्रेस के मुताबिक, इन मामलों को मिलाकर पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में कुल 16,554 मतों से जुड़ी अनियमितताओं का आरोप है। पार्टी ने निर्वाचन आयोग से मामले की जांच कराने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और निर्वाचन आयोग की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
13,150 मतदाताओं के नाम कैसे बदले? कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के अंतिम मसौदे के प्रकाशन के बाद भी सूची में बदलाव किए गए। पार्टी के नेताओं के अनुसार, पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में कुछ मतदाताओं की पहचान संख्या और क्रम संख्या पहले जैसी ही रहीं, लेकिन उनके नाम बदल दिए गए।
कांग्रेस ने इस कथित बदलाव को गंभीर मामला बताते हुए सवाल उठाया है कि यदि पहचान संख्या समान थी, तो नामों में बदलाव किस प्रक्रिया के तहत किया गया। पार्टी ने कहा है कि वह संबंधित आंकड़ों और सूची को निर्वाचन आयोग के सामने रखेगी, ताकि मामले की जांच हो सके।
804 मतदाताओं के नाम काटने का आरोप
कांग्रेस ने यह भी दावा किया है कि क्षेत्र के 804 वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। पार्टी का कहना है कि यदि पात्र मतदाताओं के नाम बिना उचित प्रक्रिया के हटाए गए हैं, तो इससे उनके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
इसके साथ ही कांग्रेस ने 2,600 ऐसे लोगों के नाम जोड़े जाने का आरोप लगाया है, जो कथित तौर पर संबंधित क्षेत्र में नहीं रहते। इन दावों की पुष्टि के लिए मतदाता सूची, संबंधित आवेदन और निर्वाचन अधिकारियों के रिकॉर्ड की जांच जरूरी होगी।
एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग
कांग्रेस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निर्वाचन आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी नेताओं ने कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई।
कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधित करने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। वहीं, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही निकाला जा सकता है।
मतदाता अपनी जानकारी कैसे जांचें?
मतदाता भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी पहचान संख्या के जरिए मतदाता सूची में दर्ज विवरण देख सकते हैं। यदि नाम, पता या अन्य जानकारी में गलती मिलती है, तो संबंधित निर्वाचन अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, मतदाता सूची में दर्ज विवरण सुधारने के लिए प्रपत्र-8 का इस्तेमाल किया जा सकता है। किसी पात्र व्यक्ति का नाम गलत तरीके से हटाए जाने की आशंका होने पर भी संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी से जानकारी लेकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना चाहिए।
फिलहाल पीलीभीत का मामला मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है। कांग्रेस के आरोपों की आधिकारिक जांच और निर्वाचन आयोग की विस्तृत प्रतिक्रिया से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला तकनीकी त्रुटियों का है या किसी बड़ी अनियमितता का।












